बाल श्रम एक विकृति है जो विभिन्न राष्ट्रों में बचपन को लूट लेती है। यह आपत्तिजनक है और समाज में अन्यायपूर्ण और अमानवीय होता है। इसीलिए बाल श्रम के विरुद्ध विश्व बाल दिवस का आयोजन हर साल 12 जून को किया जाता है। यह विश्व स्तर पर इस सामाजिक अन्याय को जागरूकता प्रदान करने और इससे रोकथाम के लिए प्रतिबद्धता जताने का एक अवसर है।बाल श्रम से शिक्षा, खेल-कूद, स्वास्थ्य और उचित विकास छीन जाता है। छोटे बच्चों को मानसिक, शारीरिक और आधारभूत आवश्यकताओं से वंचित रखने से उन्हें उच्चारण, पठन, लेखन और गणना जैसे बुनियादी कौशलों का विकास नहीं हो पाता है। यह उन्हें आदिम अवस्था में ही मजदूरी के बंधनों में बांध देता है, जिसके कारण वे समाज की मुख्यमंत्री स्थिति से वंचित रहते हैं।संबंधित प्रशासनिक और सामाजिक संगठनों को बाल श्रम के खिलाफ कठोर कानूनों की निष्पादन की जरूरत है। इसके लिए समर्पित संविधानिक, कानूनी और न्यायिक प्रणाली की आवश्यकता है जो बाल श्रम को गंभीरता से लेते हैं। इसके साथ ही, निर्देशांक, प्रोग्राम और योजनाओं को विकसित करने की आवश्यकता है जो बालों को शिक्षा, संरक्षण, स्वास्थ्य और सुरक्षा के साथ एक नई संभावना देते हैं।इसके अलावा, परिवारों, समाज सदस्यों और व्यापारियों को भी बाल श्रम के खिलाफ अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए। संगठनों को बच्चों की नियुक्ति और कार्य के लिए उचित मानदंड निर्धारित करने चाहिए और विभिन्न उद्योगों में बाल श्रम की संभावना को रोकने के लिए सक्रिय रूप से काम करना चाहिए।शिक्षा महत्वपूर्ण एक अद्यापित कार्यक्रम होनी चाहिए, जिसमें बालों को उनके अधिकारों के बारे में जागरूक किया जाए, उन्हें स्वतंत्रता का अधिकार मिले, और उन्हें समाज में इस विषय पर अनेकानेक अन्तरराष्ट्रीय संगठन ने अपने प्रयास शुरू किए हैं।
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